
जैन धर्माबलंबियों ने दशलक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म मनाया
गया।भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण पर्व के चौथे दिन बुधवार को शहर के रमना रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम शौच धर्म मानते हुए पूजा- अर्चना की। जैन संत परम पूज्य श्रमणाचार्य मुनिराज संस्कार सागर जी महाराज ने बताया कि उत्तम शौच धर्म हमें शुद्ध मन से जितना मिला है उसी के अनुरूप के खुश रहने का भाव सिखाता है। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि मेरे पास जो कुछ भी है उसमें संतुष्ट रहना चाहिए और सांसारिक भोग विलास की वस्तुओं एवं संपत्ति को कम से कम रखना चाहिए। शुद्ध मन से जितना मिला है उसी में खुश रहो। परमात्मा का हमेशा शुक्रिया मानो और अपनी आत्मा शुद्ध बनाकर ही परम आनंद मोक्ष को प्राप्त करना मुमकिन है। चौथे दिन जैन श्रद्धालुओं ने सिद्ध भगवान, देव शास्त्र गुरु पंच परमेष्ठी, नव देवता पूजन, चौबीसी पूजन, मूलनायक, तीर्थंकर पूजन, पुष्पदंत भगवान पूजन,(मोक्ष कल्याणक) निर्वाण कांड,सोलहकारण पूजन, पंचमेरू पूजन,दशलक्षण पूजन एवं स्वयंभू स्तोत्र का सामूहिक रूप से पाठ कर विश्व में शांति और सुख समृद्धि की मंगल कामना की। जैन समाज के मीडिया प्रभारी मुन्ना सरकार जैन ने बताया कि दशलक्षण का पालन करने से आत्मा की शुद्धि होती है। व्रत के चौथे दिन जैन धर्मावलंबियों ने शौच अथवा लोभ त्यागने का संकल्प लिया। बुधवार को व्रत के चौथे दिन प्रातः अभिषेक और शांति धारा पूजन किया गया। दशलक्षण के लिए बने वेदी पर नारियल,सुखे मेवे, लौंग इलाइची अर्पित कर विशेष अनुष्ठान और मंत्रों का जाप किया।दोपहर में स्वाध्याय अपनी आत्मा का चिंतन व कर्मों की चिंतन किया गया। शाम को भगवान की आरती और धर्म चर्चा करते हुए चौथे दिन का व्रत पूरा किया। 19 सितंबर तक दशलक्षण व्रत किया जाएगा। अंतिम दिन क्षमावाणी के साथ पर्यूषण पर्व का दस दिवसीय अनुष्ठान संपन्न हो जाएगा। इस धार्मिक महापर्व को लेकर जैन समाज के लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है रंग-बिरंगे पोशाकों और आभूषणों से सुसज्जित होकर महिलाएं दश लक्षण पर्व के अनुष्ठान में हिस्सा ले रही हैं। इस मौके पर राजकुमारी गंगवाल, संतोषी गंगवाल, मोनिका अजमेरा,जैन समाज के अध्यक्ष अजीत छाबड़ा, उपाध्यक्ष विकास पाटनी, कोषाध्यक्ष हर्ष काला, मंत्री हेमंत पाटनी, सह मंत्री अर्पित पाटनी, सत्येंद्र अजमेरा, अमूल्य अजमेरा,मधु कांत काला सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के पुरुषों और महिलाओं ने हिस्सा लिया।
त्रिलोकी नाथ डिस्ट्रिक्ट डिवीजन हेड गया
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